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मंगलवार, 21 अप्रैल 2015

गट्टू

बच्चों, आज मैं आपको एक और फिल्म के बारे में बताने जा रही हूँ, जो आपको बहुत अच्छी लगेगी. फिल्म का नाम है "गट्टू" और इसे Children Film Society of India ने बनाया है. निर्देशक हैं- राजन खोसा. 20 जुलाई 2012 को रिलीज़ हुयी इस फिल्म को फिल्म समीक्षकों ने बहुत सराहा.

फिल्म का हीरो गट्टू एक बेहद गरीब लड़का है और अपने एक रिश्तेदार के यहाँ काम करता है. उसके पास स्कूल की फीस लायक पैसे नहीं हैं इसलिए स्कूल नहीं जाता. गट्टू को पतंग उड़ाना बहुत पसंद है और वो बहुत सी पतंगों को काट चुका है. लेकिन कस्बे में एक ऐसी पतंग है जिससे पेंच लड़ाकर कोई जीत नहीं पाया. उस पतंग को कस्बे के बच्चे 'काली' कहते हैं. गट्टू का सपना है कि वह एक न एक दिन इस पतंग को ज़रूर काटेगा. वह सोचता है कि अगर कस्बे के स्कूल की छत से पतंग उडाये तो काली को जीत सकता है.

एक दिन मौका पाकर गट्टू एक बच्चे की यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल में घुस जाता है. वह स्कूल पहुँच तो जाता है लेकिन उसे पढ़ना-लिखना तो आता ही नहीं. अब आप सोचिये कि गट्टू कैसे सबके सवालों का जवाब दे पायेगा? क्या गट्टू छत तक पहुँचकर काली को काट पायेगा या पकड़ा जाएगा और सज़ा पायेगा? ये सब आपको फिल्म देखकर ही पता चल पायेगा. मैं बता दूँगी तो सस्पेंस खत्म हो जाएगा न ?

तो आप अपने मम्मी-पापा से कहकर ये फिल्म मंगवाएँ और ज़रूर देखें. आपके मम्मी-पापा और बड़े भाई-बहनों को भी फिल्म खूब मज़ेदार लगेगी. यहाँ मैं 'गट्टू' के ऑफिसियल ट्रेलर का वीडियो लगा रही हूँ. यू ट्यूब पर ये मूवी कुछ किस्तों में देखने को मिल सकती है.


सोमवार, 13 अप्रैल 2015

चुन चुन करती आयी चिड़िया


बच्चों, आज आपके लिए एक प्यारा सा गीत. हमलोग इस गीत को बचपन में खूब गुनगुनाते थे.





चुन चुन करती आई चिड़िया
दाल का दाना लाई चिड़िया
मोर भी आया, कौवा भी आया
चूहा भी आया, बन्दर भी आया
चुन चुन करती..
भूख लगे तो चिड़िया रानी
मूँग की दाल पकाएगी
कौवा रोटी लाएगा
लाके उसे खिलाएगा
मोर भी आया…
चलते चलते मिलेगा भालू
हम बोलेंगे नाचो कालू
मुन्ना ढोल बजाएगा
भालू नाच दिखाएगा
मोर भी आया…

साथ हमारे चले बराती
मैं तो हूँ मुन्ने का हाथी
सीधे दिल्ली जाऊँगा
तेरी दुल्हनिया लाऊँगा
मोर भी आया…

Movie/Album: अब दिल्ली दूर नहीं (1957)
Music By: दत्ताराम
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मो.रफ़ी

गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

एक चिड़िया अनेक चिड़िया

बच्चों, आज मैं तुम्हें एक ऐसी एनिमेटेड फिल्म के बारे में बताने जा रही हूँ, जिसे देखकर तुम्हारे मम्मी-पापा बड़े हुए हैं. इस एनिमेटेड फिल्म का नाम है "एक अनेक एकता" लेकिन हम इसे "एक चिड़िया अनेक चिड़िया" के नाम से जानते हैं.
इस फिल्म को भारत सरकार की फिल्म्स डिवीज़न ने बनाया था. 1974 में इसे दूरदर्शन पर रिलीज़ किया गया. इसकी निर्देशक विजया मुले और निर्माता भीमसेन खुराना हैं. इसे बच्चों और बड़ों ने खूब पसंद किया. ये फिल्म मज़ेदार तो है ही शिक्षाप्रद भी है. आप इसके बारे में विकीपीडिया पर और जानकारी पा सकते हैं. अभी बस ये फिल्म देखिये.




हिंद देश ... mmm mmm... हम सभी .... एक हैं ... तारा रा रा रा
भाषा अनेक हैं ... mmmm mmmm... भाषा अनेक हैं ....

यह अनेक क्या है दीदी ?
अनेक यानी बहुत सारे
बहुत सारे? क्या बहुत सारे ?
अच्छा, बताती हूँ

सूरज एक ...
चंदा एक .....
तारे अनेक ....

तारों को अनेक भी कहते हैं ?
नहीं नहीं !
देखो फिर से
सूरज एक , चंदा एक , एक एक एक करके तारे बने अनेक
ठीक से समझाओ ना दीदी

देखो देखो एक गिलहरी
पीछे पीछे अनेक गिलहरियाँ
एक तितली , ..... एक और तितली ......
एक एक एक करके हो गयी अब, अनेक तितलियाँ

समझ गया दीदी
एक उँगली , अनेक उंगलियाँ
हाँ!
दीदी दीदी वो देखो अनेक चिड़ियाँ ...

अनेक चिड़ियों की कहानी सुनोगे ....
हाँ हाँ
आ.. आ.. आ...
एक चिड़िया , एक एक करके अनेक चिड़ियाँ ..
दाना चुगने आयी चिड़ियाँ ...

सभी : दीदी हमें भी सुनाओ ना
तो सुनो फिर से ...
एक चिड़िया , अनेक चिड़ियाँ
दाना चुगने बैठ गयी थीं ...

हाय राम , पर वहाँ ब्याध ने एक जाल बिछाया था ...
ब्याध , ब्याध कौन दीदी ?
ब्याध ... चिड़िया पकड़ने वाला

फिर क्या हुआ दीदी , ब्याध ने उन्हें पकड़ लिया , मार डाला ?
हिम्मत से गर जुटे रहे तो
छोटे हो पर , मिले रहे तो
बड़ा काम भी होवे भैया ..
बड़ा काम भी होवे भैया ..

एक ..दो ..तीन ..
चतुर चिड़ियाँ... , सयानी चिड़ियाँ...
मिलजुल कर , जाल ले कर , भागी चिड़ियाँ
फुर्र.. ररर ...

दूर , एक गाँव के पास , चिड़ियों के दोस्त , चूहे रहते थे
और उन्होंने , चिड़ियों का जाल काट दिया
तो देखा तुमने , अनेक जब एक हो जाते हैं तो कैसा मज़ा आता है
दीदी मैं बताऊँ ...

हो गए एक ...
बन गयी ताकत ..
बन गयी हिम्मत ...

दीदी अगर हम एक हो जाएँ तो बड़ा काम कर सकते हैं ?
हाँ हाँ , क्यों नहीं
तो इस पेड़ के आम भी तोड़ सकते हैं ?
हाँ , तोड़ सकते हैं , पर जुगत लगनी होगी ...

अच्छा , जुगत , वाह ... बड़ा मज़ा आयेगा ..
हिंद देश के निवासी सभी जन एक हैं , -2
रंग-रूप वेश-भाषा चाहे अनेक है -2
एक-अनेक ... एक-अनेक ...

सूरज एक , चंदा एक , तारे अनेक ,
एक तितली , अनेक तितलियाँ
एक गिलहरी , अनेक गिलहरियाँ
एक चिड़िया , एक एक ... अनेक चिड़ियाँ


बेला गुलाब जूही चंपा चमेली ..... -2
फूल हैं अनेक किन्तु माला फिर एक
है ...-2 

बुधवार, 8 अप्रैल 2015

लिल्की- एक लड़की की कहानी

बच्चों, आपने अपने आस-पास बहुत से ऐसे बच्चों को देखा होगा, जो घरों में काम करते हैं. वे आपकी तरह स्कूल नहीं जाते. क्या आप उनके साथ खेलते हैं? क्या आपने कभी सोचा है कि वे बच्चे कैसा महसूस करते हैं, जब आप खेल रहे होते हैं और वे घरों में काम कर रहे होते हैं?

'लिल्की' भी दस साल की ऐसी ही लड़की की कहानी पर बनी फिल्म है. यह फिल्म 2006 में Children's Film Society, India ने बनायी है. लिल्की गढ़वाल के अपने गाँव से गाँव की एक दीदी के साथ शहर उनके बच्चे 'बिट्टू' की देखभाल करने आती है. जब उसके काम्प्लेक्स की लड़कियों को पता चलता है कि वह एक नौकरानी है, तो उसके साथ खेलना बंद कर देती हैं. लिल्की पढ़ने में बहुत होशियार थी. वह अपने गाँव के स्कूल में कक्षा में फर्स्ट आती थी, लेकिन यहाँ पढ़ने नहीं जाती है क्योंकि उसे बिट्टू को सँभालना पड़ता है. 

क्या लिल्की से उसकी बिल्डिंग की लड़कियाँ फिर से दोस्ती करती हैं? क्या वह यहीं रहती है या अपने गाँव वापस चली जाती है? क्या वह पढ़ने जाती है या नौकरानी बनकर रह जाती है? अगर आपको इन सवालों के जवाब जानने हैं तो ये फिल्म देखिये. आपको ज़रूर अच्छी लगेगी.


शनिवार, 4 अप्रैल 2015

नानी, कहानी सुनाओ... नहीं नहीं, नानी, कहानी सुनो....

प्यारे बच्चों, हम सब लोगों को हमारी नानी बहुत प्यारी होती है. होती है ना... मम्मी से कोई बात मनवानी हो तो उसका सबसे आसान तरीका पहले नानी को पटाना ही होता है... नानी मान गयी तो बस, मामला फिट...
अब नानी की बात हो और कहानी की बात ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता. वो राजा-रानी, परियां, चाँद पर की बुढ़िया, कुबड़ा जादूगर... कई तरह की हजारों हजार कहानियों का पुलिंदा होता है नानी के पास. पर क्या कभी ऐसा भी होता है कि बजाए नानी के कहानी सुनाने के, बच्चे नानी को कहानी सुनाते हैं? है ना अजीब बात... पर ऐसा भी होता है... अब चॉकलेट या आइसक्रीम के लिए नानी से पैसे लेने हों तो कम से कम एक कहानी तो सुनानी ही पड़ेगी ना नानी को... चलो तो तुम भी ऐसी एक कहानी पढो और सुनो... पहले नया एनिमेटेड विडियो और साथ में ओरिजिनल ब्लैक-एंड-वाइट विडियो भी... ध्यान रखना, ओरिजिनल विडियो हालांकि 65 साल पुराना है, पर तुम अब भी इसके स्टेप्स प्रैक्टिस कर के अपनी नानी को खुश कर सकते हो....

नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए,
बाकी जो बचा था काले चोर ले गए.

खा के पी के मोटे हो कर चोर बैठे रेल में,
चोरों वाला डब्बा कट कर पहुँचा सीधा जेल में,

नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए,
बाकी जो बचा था काले चोर ले गए.

उन चोरों की खूब खबर ली मोटे थानेदार ने,
मोरों को भी खूब नचाया जंगल की सरकार ने.

नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए,
बाकी जो बचा था काले चोर ले गए.

अच्छी नानी प्यारी नानी, रूस-रूसी छोड़ दे,
जल्दी से एक पईसा दे दे तू कंजूसी छोड़ दे.

नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए,
बाकी जो बचा था काले चोर ले गए.
  






सोमवार, 30 मार्च 2015

ये नाम क्यों?

ब्लॉग का नाम सोचते समय बस ऐसे ही बचपन में सुना "ईचक दाना बीचक दाना" गीत याद आ गया और सोचा कि क्यों न इस ब्लॉग का नाम यही रख दिया जाय? बच्चों, हो सकता है कि तुमने राज कपूर का नाम अपने मम्मी-पापा के मुँह से सुना हो. वो एक बहुत बड़े फिल्म मेकर थे. उन्होंने बहुत सी फ़िल्में बनाईं. "श्री 420" भी उन्हीं की फिल्म है. उसी फिल्म का गाना है "ईचक दाना बीचक दाना." इसे लता मंगेशकर जी और मुकेश जी ने मिलकर गया है. बड़ा मज़ेदार गीत है. आपको उस गाने के ओरिजिनल वीडियो के साथ-साथ एनिमेटेड वीडियो भी दिखा रही हूँ. यह वीडियो सारेगामा कम्पनी के YOUTUBE के चैनल पर उपलब्ध है.