शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015

"गुल्लू"- (बालगीत)

बच्चों, आज 'कलीम अव्वल' जी का लिखा बालगीत प्रस्तुत है. इस गीत से परिचय हमारे मित्र श्री प्रकाश गोविन्द जी ने कराया. आशा है कि आपको पसंद आएगा.

गुल्लू बाबू 'एयर गन' ले /करने चले शिकार
साथ गाँव भर के थे बच्चे /करते हाहाकार
***
गुल्लू बाबू लगे सुनाने /कैसे मारा शेर
कैसे मारा चीता हमने/हाथी से मुठभेड़
***
"इक दिन मिला भयंकर भालू /छेंक लिया पथ सारा
ऐसा मारा झापड़ उसको /उलट गया बेचारा
***
और बताएं गैंडा इक दिन /मेरे पीछे दौड़ा
एक उठाया ढेला हमने /माथा उसका फोड़ा
***
अरना भैंसा मिला एक दिन /लगा फुलाने नथुने
ऐसी डांट पिलाई उसको /थर-थर लगा कांपने
***
अजगर की फिर पूंछ पकड़ कर /घर तक उसे घसीटा
बाघों को तो बांध-बांध कर /जब जी चाहा पीटा "
***
तभी पांव पर इक चूहे ने /लम्बी कूद लगाई
तब से हैं बेहोश अभी तक/अपने गुल्लू भाई

2 टिप्‍पणियां:

  1. नहीं बता सकती मैं तुमको /कितनी हँसी है आई
    पेट पकड़ कर कूद रही हूँ /हा हा हो हो आ ईईई!!!

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